/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\!! श्री गणेशाय नमः !!/\/\/\/\/\!! ૐ श्री श्याम देवाय नमः !!\/\/\/\/\!! श्री हनुमते नमः !!/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\

Tuesday, 7 December 2010

!! चाल पड्यो लीलो ल्यावण न, श्यामधणी न चाल पड्यो... !!




श्री श्यामधणी खाटू वाले की असवारी लीला घोड़ा है... ऐसा सभी श्री श्याम प्रेमियों का विश्वास है, कि जहाँ कहीं भी बाबा श्यामधणी का कीर्तन होता है, और जब भक्त उनको सच्चे हृदय से पुकारते है तो, वहाँ स्वयं बाबा श्याम लीले घोड़े पर असवार हो उपस्थित हो जाते है... कीर्तन में सभी श्री श्याम प्रेमीजन, जब श्री मोरवीनंदन श्यामधणी के जयकारों का उद्घोष करते है तो, बाबा श्यामधणी का लीला घोड़ा प्रभु श्री श्याम को उत्सव स्थल तक ले आता है... उनके आने का आभास लीले के पैरों में पड़े घुंघरू की ध्वनि से हो जाता है...


आज श्री मोरवीनंदन श्यामधणी का आलौकिक दरबार सजा है... सभी श्री श्याम प्रेमीजन श्री श्याम बाबा का जयकारा लगा रहे है... और उन जयकारों को सुन लीला घोड़ा चल पड़ता है, श्री श्याम धणी को उत्सव स्थल पर लाने के लिए... आइये हम सभी मधुर भावो से उपरोक्त कही गयी बातो का रसास्वादन करे...




चाल पड्यो लीलो ल्यावण न, श्यामधणी न चाल पड्यो...
सुण जयकारो भगतां रो प्यारो, लीलो ल्यावण चाल पड्यो...
चाल पड्यो लीलो ल्यावण न, श्यामधणी न चाल पड्यो...



बाज रहया लीला का घुंघरू, देर नहीं अब आवण म...
गूंज उठी शहनाई देखो, नगरी क हर आंगण म...
जयकारो एक और सुण्यो, लीलो झटपट दौड़ पड्यो...
चाल पड्यो लीलो ल्यावण न, श्यामधणी न चाल पड्यो...



सज्यो श्याम दरबार, पत्ता हरा पीला नीला स...
इत्तर केसर की खुशबु स, भांति-भांति क फुलां स...
सुण शंख की नाद, बच्चो घर-घर स ह दौड़ पड्यो...
चाल पड्यो लीलो ल्यावण न,श्यामधणी न चाल पड्यो...



पल दो पल की ह देरी, बाबो म्हारो आवलो...
कोसां चाल कर आय रहयो, आय थकान मिटावलो...
रतन जडित सिंहासन ऊपर, चांदी को छत्तर लटक्यो...
चाल पड्यो लीलो ल्यावण न, श्यामधणी न चाल पड्यो...



गंगा जल स चरण धुवावां, भगतां मिल सब चंवर डुलावां...
लीला न गुड दाल चणा की, बाबा न पकवान खुआवां...
रिझावण 'टीकम' लीलो, बांध घुंघरू नाच पड्यो...
चाल पड्यो लीलो ल्यावण न,श्यामधणी न चाल पड्यो...



चाल पड्यो लीलो ल्यावण न, श्यामधणी न चाल पड्यो...
सुण जयकारो भगतां रो प्यारो, लीलो ल्यावण चाल पड्यो...
चाल पड्यो लीलो ल्यावण न , श्यामधणी न चाल पड्यो...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय शीश के दानी, जय जय खाटू धाम !!
!! म्हे आया शरण तिहारी, शरण म अपणे लेलो श्याम !!


भजन : " श्री महाबीर सराफ जी"

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थे भी एक बार श्याम बाबा जी रो जयकारो प्रेम सुं लगाओ...

!! श्यामधणी सरकार की जय !!
!! शीश के दानी की जय !!
!! खाटू नरेश की जय !!
!! लखदातार की जय !!
!! हारे के सहारे की जय !!
!! लीले के असवार की जय !!
!! श्री मोरवीनंदन श्यामजी की जय !!

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