/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\!! श्री गणेशाय नमः !!/\/\/\/\/\!! ૐ श्री श्याम देवाय नमः !!\/\/\/\/\!! श्री हनुमते नमः !!/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\

Saturday, 30 April 2011

!! खाटू वाला मेरा बाबा श्याम... !!




सच्चे ह्रदय से भगवान को चाहने वाला मनुष्य किसी भी वर्ण, आश्रम, संप्रदाय, परिस्थिति आदि में क्यों न हो, तथा कितना भी पापी, दुराचारी क्यों न हो, वह भगवदप्राप्ति का पूर्ण अधिकारी हो जाता है... और मेरा यह पूर्ण विश्वास है, कि जिसने भी सच्चे ह्रदय से इष्टदेव, कुलदेव, हारे के सहारे श्री श्यामधणी को ध्याया है उसी ने श्री श्यामधणी का साथ पग पग पर पाया है, इसलिए तो कहते है, कि...




कोई तुमको बिसराये, तू क्यूँ घबराये...
ये पग-पग साथ निभाये, खाटू वाला मेरा बाबा श्याम...
लीले वाला मेरा बाबा श्याम...



हारे का है सहारा मेरा श्याम, कश्ती का है किनारा मेरा श्याम...
दुःखड़ो में आये यही तेरे काम, दुःखड़ो में आये यही तेरे काम...



कोई तकलीफ सताये, तू क्यूँ घबराये...
ये पल में आन मिटाये, खाटू वाला मेरा बाबा श्याम...
लीले वाला मेरा बाबा श्याम...



मांगोगे जो मिलेगा उतना, सच होगा तुम्हारा सपना...
चरणों में जाके जरा तू झुकना, चरणों में जाके जरा तू झुकना...



कोई नहीं पास बिठाये, तू  क्यूँ घबराये...
ये सिर पर हाथ फिराये,  खाटू वाला मेरा बाबा श्याम...
लीले वाला मेरा बाबा श्याम...



'हर्ष' शरण में तू आजा ईकबार, भर देगा ये तेरा तो भण्डार...
साँवरा दयालु बड़ा ही दतार, साँवरा दयालु बड़ा ही दतार...



कोई  तुमको ठुकराये,  तू  क्यूँ घबराये...
ये गले से लगाये, खाटू वाला मेरा बाबा श्याम...
लीले वाला मेरा बाबा श्याम...



कोई  तुमको बिसराये, तू क्यूँ घबराये...
ये पग-पग साथ निभाये, खाटू वाला मेरा बाबा श्याम...
लीले वाला मेरा बाबा श्याम...


खाटू वाला मेरा बाबा श्याम...
लीले वाला मेरा बाबा श्याम...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!



भजन : "श्री विनोद अग्रवाल जी"

Wednesday, 27 April 2011

!! चालो खाटू म मिलेगो बाबो श्याम धणी... !!




चालो जी चालो ओ श्याम प्रेमियों, बाबा श्याम जी रा खाटू के दरबार, जठे विराजे ह श्री श्यामधणी और लुटावे ह निज भगतां पर अपणी महर घणी...



चालो खाटू म मिलेगो बाबो श्याम धणी...
चालो खाटू म मिलेगो बाबो श्याम धणी...
ओ हो चालो  खाटू म...



सुन्दर बागों सज्यो श्याम क, स्वर्ण मुकुट सिरधारी जी...
सुन्दर बागों सज्यो श्याम क, स्वर्ण मुकुट सिरधारी जी...
भगतां रा हिवड़े मांहि बासगी, हीरे री कणी...
ओ हो चालो  खाटू म...



बैठ सिंहासन न्याय चुकावे, कलयुग को अवतारी जी...
बैठ सिंहासन न्याय चुकावे, कलयुग को अवतारी जी...
दीन दुखी की भीड़ जुड़े, नित द्वारे पर घणी...
ओ हो चालो  खाटू म...



देर करे नहीं श्याम हमारो, तुरंत भगत की पीड़ हरे...
देर करे नहीं श्याम हमारो, तुरंत भगत की पीड़ हरे...
श्याम की सेवा म कर अर्पण, जिंदगानी अपणी...
ओ हो चालो  खाटू म...



एक-एक तेरे घट की जाणे, तीन बाण को धारी जी...
एक-एक तेरे घट की जाणे, तीन बाण को धारी जी...
अपणे भगत की लाज श्याम ने, आवे रखणी...
ओ हो चालो  खाटू म...



दर्शन करले झोली भरले, जो चाहे सो पा ले रे...
दर्शन करले झोली भरले, जो चाहे सो पा ले रे...
"श्यामसुन्दर" यो दानवीर, महाभारत को रणी...
ओ हो चलो खाटू म...



चालो खाटू म मिलेगो बाबो श्याम धणी...
चालो खाटू म मिलेगो बाबो श्याम धणी...
ओ हो चालो  खाटू म...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!



 
भजन :  "श्री श्यामसुन्दर जी"

 
श्री श्याम बाबा जी को समर्पित यह अनुपम भाव राजस्थानी लोकगीत "धमाल" के तर्ज़  पर आधारित है...

Sunday, 24 April 2011

!! दरश दिखा दयो नि बाबा श्याम जी... !!




हे इष्टदेव, कुलदेव, खाटूपति श्री बाबा श्याम जी आज बारस की इस पुनीत बेला पर थारा सगला भगतां हिलमिल थारी ज्योत जगाई ह और थारे श्री दर्शन की चाह म  थां सूं आ अरज लगाई ह... 




ओ बाबा थारे दरश ने अँखियाँ तरसे, ओ बाबा थारे दरश स हिवड़ो हुलसे...
दरश दिखा दयो नि बाबा श्याम जी...
दरश दिखा दयो नि बाबा श्याम जी...



ओ बाबा थाणे कर अरदास बुलावां, ओ बाबा थारी ज्योति आज जगावां...
म्हारे घर आओ नि बाबा श्याम जी...
म्हारे घर आओ नि  बाबा श्याम जी...



ओ बाबा थे तो हारे रा हो सहारा, ओ मेटो थे तो भगतां रा दुःख सारा...
ओ कष्ट मिटाओ नि बाबा श्याम जी...
ओ कष्ट मिटाओ नि बाबा श्याम जी...



ओ बाबा थारी महिमा सारा गावें, ओ बाबा थारे नाम सु भव तीर जावे...
म्हाणे भी तिराओ नि बाबा श्याम जी...
म्हाणे भी तिराओ नि बाबा श्याम जी...



ओ बाबा थे तो भगतां रा रखवाला, ओ बाबा थे तो माँ मोरवी रा लाला...
बेगा बेगा आओ नि बाबा श्याम जी...
बेगा बेगा आओ नि बाबा श्याम जी...



ओ बाबा थे तो भगतां री हो आशा, बाबा थे तो सबकी दूर करो निराशा...
आश बंधाओ नि बाबा श्याम जी...
अब घरां आओ नि बाबा श्याम जी...



ओ बाबा थाणे भगतां आज मनावे, बाबा थारा चरणा म धोक लगावे... 
दर पे बुलाओ नि बाबा श्याम जी...
दर पे बुलाओ नि बाबा श्याम जी...



ओ बाबा थारे दरश ने अँखियाँ तरसे, ओ बाबा थारे दरश स हिवड़ो हुलसे...
ओ बाबा थाणे कर अरदास बुलावां, ओ बाबा थारी ज्योति आज जगावां...
म्हारे घर आओ नि बाबा श्याम जी...
दरश दिखाओ नि बाबा श्याम जी...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!



श्री श्याम बाबा की यह अनुपम छवि  "श्री श्याम महोत्सव, भरतपुर, राजस्थान" की है...  

Thursday, 21 April 2011

!! अब तू ही बता ओ श्याम, कुण पार लगावेगो... !!



हे इष्टदेव, कुलदेव श्री श्यामधणी, थारा द्वार पर खड्या थारा टाबरिया थां सु आ ही अरज करे है...



अब तू ही बता ओ श्याम, कुण पार लगावेगो...
कुण आडे आवेगो, कुण आडे आवेगो...
अब तू ही बता ओ श्याम, कुण पार लगावेगो...



दुनिया थारी ऐसी है, बटका सा भरे मेरे...
गर तू नहीं होवे तो, नैया ने डुबो गैरे..
नैया ने डुबो गैरे, नैया ने डुबो गैरे..
फँसगी मझधारा म, कुण राह दिखावेगो...



अब तू ही बता ओ श्याम, कुण पार लगावेगो...
कुण आडे आवेगो, कुण आडे आवेगो...



तू दाता दुनिया को, पण देवे लिख्यो लिख्यो...
मेरी गर मिटगी तो, फेरु स श्याम लिखो...
फेरु स श्याम लिखो, फेरु स श्याम लिखो...
फूटी मेरी किस्मत ने, कद हाथ लगावेगो...



अब तू ही बता ओ श्याम, कुण पार लगावेगो...
कुण आडे आवेगो, कुण आडे आवेगो...



कहवे 'रामकुमार' ओ श्याम, अरजी मेरी सुन लीज्यो...
मेरी आफत ने टालो, काणा तल मत दीज्यो...
काणा तल मत दीज्यो, काणा तल मत दीज्यो...
तेरे हाथां म पतवार,  सु ही तो जानेगो...



अब तू ही बता ओ श्याम, कुण पार लगावेगो...
कुण आडे आवेगो, कुण आडे आवेगो...
अब तू ही बता ओ श्याम, कुण पार लगावेगो...
कुण आडे आवेगो, कुण आडे आवेगो...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!



भजन  : "श्री रामकुमार जी"

 
श्री श्याम बाबा की यह अनुपम छवि "श्री श्याम मंदिर, रांची, झारखण्ड" की है...

Monday, 18 April 2011

!! पावन पवित्र है ये, अद्भुत चरित्र है ये... !!






श्रीमद भागवत गीता के मतानुसार जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब भगवान् साकार रूप धारण कर दीन भक्तजन, साधु एवं सज्जन पुरुषों का उद्धार तथा पाप कर्म में प्रवृत रहने वालो का विनाश कर सधर्म की स्थापना किया करते है... उनके अवतार ग्रहण का न तो कोई निश्चित समय होता है और न ही कोई निश्चित रूप... धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि को देखकर जिस समय वे अपना प्रगट होना आवश्यक समझते है, तभी प्रगट हो जाते है...



ऐसे कृपालु भगवान के पास अपने अनन्य भक्त के लिए कुछ भी अदेय नहीं होता... परन्तु सच्चा भक्त कोई विरला ही मिलता है... यद्यपि उस सच्चिदानंद भगवान के भक्तो की विभिन्न कोटिया होती है, परन्तु जो प्राणी संसार, शरीर तथा अपने आपको सर्वथा भूलकर अनन्य भाव से नित्य निरंतर केवल श्री भगवान में स्थिर रहकर हेतुरहित एवं अविरल प्रेम करता है, एवं दीन-हीन मनुष्यों का सहारा बन परोपकार को ही अपने जीवन का ध्येय बनाता है, वही श्री भगवान को सर्वदा प्रिय होता है...



श्री भगवान के भक्तो की इसी कोटि में पाण्डव कुलभूषण श्री भीमसेन के पोत्र एवं महाबली घटोत्कच के पुत्र, मोरवीनंदन वीर शिरोमणि श्री बर्बरीक भी आते है... महाभारत के युद्ध में उपस्थित होकर वीर बर्बरीक ने अपने एक ही बाण से समस्त वीरो को आश्चर्य में डाल दिया... एवं अपनी विमल भक्ति से उन्होंने भगवान् श्री कृष्ण को भी मुग्ध कर दिया... उनके इसी अद्भुत वीरता पर प्रसन्न होकर भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें कलियुग में देव रूप में पूजित होकर भक्तों की मनोकामनाओ को पूर्ण करने का वरदान किया... एवं १४ देवियों द्वारा उनके शीश को (जिनको स्वयं मधुसुदन ने अपने हाथो में थाम रखा था) अमृत से सींचन करवाकर वीर बर्बरीक के शीश को, देवत्व प्रदान करके अजर अमर कर दिया... एवं कलिकाल में श्री बर्बरीक जी का देवत्व प्राप्त शीश राजस्थान के "खाटू" नामक पवित्र नगरी में "श्याम कुण्ड" में से श्री श्याम जी का नाम धारण कर प्रगट हुआ...



आइये हम सभी मिल श्री श्याम जी के श्री चरणों में ध्यान लगा उनके दिव्य चरित्र की वंदना करे...




पावन पवित्र है ये, अद्भुत चरित्र है ये...
पावन पवित्र है ये, अद्भुत चरित्र है ये...
खाटू नरेश मेरे, ओ खाटू नरेश मेरे...
खाटू नरेश मेरे, हारे के मित्र है ये...
कुलदेव ये हमारे, हारे के मित्र है ये...



श्रद्धा के पुष्प अर्पण, चरणों मैं तेरे करता...
सादर नमन तुम्हे कर, मैं नाम हूँ सुमिरता...
मेरे ह्रदय में अंकित, इनका ही चित्र है ये...
खाटू नरेश मेरे, हारे के मित्र है ये...



ना तुम समान दानी, इस विश्व में है दूजा...
चारो दिशाओ में अब, होती है तेरी पूजा...
जो शीश के दानी, उनका ही जिक्र है ये...
खाटू नरेश मेरे, हारे के मित्र है ये...



आकाश पृथ्वी सारे, सूरज व चाँद तारे...
करते है जिनको वंदन, कुलदेव है हमारे...
चिंताओ का है मेरी, इनको ही फिक्र है ये...
खाटू नरेश मेरे, हारे के मित्र है ये...



पग-पग पे साथ इनका, मैंने सदा है पाया...
हर कष्ट की घड़ी में, इनको ही मैंने ध्याया...
क्या करे दे 'श्यामसुन्दर', लीला विचित्र है ये...
खाटू नरेश मेरे, हारे के मित्र है ये...



पावन पवित्र है ये, अद्भुत चरित्र है ये...
पावन पवित्र है ये, अद्भुत चरित्र है ये...
खाटू नरेश मेरे, ओ खाटू नरेश मेरे...
खाटू नरेश मेरे, हारे के मित्र है ये...
कुलदेव ये हमारे, हारे के मित्र है ये...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!


भजन : "श्री श्यामसुन्दर जी"

Friday, 15 April 2011

!! दिल पर तेरी ओ बाबा, तस्वीर बना ली है... !!




हे! निज प्रेमियों के प्रेमाधार हारे के सहारे श्री श्यामधणी, आपकी इस सुन्दर छवि को अपने ह्रदय में धारण करते हुये, आपके प्रेमीजन आपसे यु अपने ह्रदय की भावनाओ की अभिव्यक्ति करते है...




दिल पर तेरी ओ बाबा, तस्वीर बना ली है...
दिल पर तेरी ओ बाबा, तस्वीर बना ली है...
गुलशन है ये तुम्हारा, इसका तू ही माली है...
गुलशन है ये तुम्हारा, इसका तू ही माली है...
तस्वीर बना ली है...



मालिक मकान तू है, मेरा जहान तू है...
कहकर क्या मैं पुकारू, प्राणों का प्राण तू है...
तू ही मेरा दशहरा, और तू ही दिवाली है...
तू ही मेरा दशहरा, और तू ही दिवाली है...
तस्वीर बना ली है...



धड़कन ही बोलती है, अन्तः टटोलती है..
भावो की बात अपने, भावो से तोलती है..
कहता नहीं जुबान से, ऐसा ये सवाली है...
कहता नहीं जुबान से, ऐसा ये सवाली है...
तस्वीर बना ली है...



तुझे श्याम सब पता है, जग से क्या वास्ता है...
संसार के रचैया, सेवक की क्या खता है...
'शिव' श्यामबहादुर ने, हस्ती ही मिटा ली है...
'शिव' श्यामबहादुर ने, हस्ती ही मिटा ली है...
तस्वीर बना ली है...



दिल पर तेरी ओ बाबा, तस्वीर बना ली है...
दिल पर तेरी ओ बाबा, तस्वीर बना ली है...
गुलशन है ये तुम्हारा, इसका तू ही माली है...
गुलशन है ये तुम्हारा, इसका तू ही माली है...
तस्वीर बना ली है...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!



भजन : "श्री शिवचरण जी अग्रवाल"


श्री श्याम बाबा की यह अनुपम छवि सुश्री शिप्रा बंसल जी के निज निवास की है...

Tuesday, 12 April 2011

!! करता हूँ तुम्हारा वंदन, स्वीकारो हे! मोरवीनंदन... !!




हे इष्टदेव, कुलदेव, माता मोरवी के लाल श्री श्यामधणी थारा द्वार पे बैठ्यो थारो बालकियो थारो वंदन करे ह, एवं था सु आं अरज करे है, कि




करता हूँ तुम्हारा वंदन, स्वीकारो हे! मोरवीनंदन...
करता हूँ तुम्हारा वंदन, स्वीकारो हे! मोरवीनंदन...
मझधार में मैं अटका, मुझको तारो मोरवीनंदन...
मुझको तारो मोरवीनंदन...



जय जय श्याम बाबा, जय जय श्याम बाबा...
जय जय श्याम बाबा, जय जय श्याम बाबा...



बैठा हूँ बड़ी आशा से, तुम्हारे दरबार में...
क्यों रोये तुम्हारा बेटा, इस निर्दयी संसार में...
पलटा दो मेरी भी किस्मत, उद्धार करो मोरवीनंदन...
मझधार में मैं अटका, मुझको तारो मोरवीनंदन...
मुझको तारो मोरवीनंदन...



जय जय श्याम बाबा, जय जय श्याम बाबा...
जय जय श्याम बाबा, जय जय श्याम बाबा...



मेरे लिए तो बंद है, दुनिया की सब राहे...
कल्याण मेरा हो सकता है, बाबा आप जो चाहे...
चिंता की आग से मेरा, निस्तार करो मोरवीनंदन...
मझधार में मैं अटका, मुझको तारो मोरवीनंदन...
मुझको तारो मोरवीनंदन...



जय जय श्याम बाबा, जय जय श्याम बाबा...
जय जय श्याम बाबा, जय जय श्याम बाबा...



दिल करता है तुम्हारे, चरणों से लिपट जाऊं...
गले तुम्हे लगा करके, अपना हाल सुनाऊं...
अपने करुणामयी हाथो को, सिर पे फेरो मोरवीनंदन...
मझधार में मैं अटका, मुझको तारो मोरवीनंदन...
मुझको तारो मोरवीनंदन...



जय जय श्याम बाबा, जय जय श्याम बाबा...
जय जय श्याम बाबा, जय जय श्याम बाबा...



करता हूँ तुम्हारा वंदन, स्वीकारो हे! मोरवीनंदन...
करता हूँ तुम्हारा वंदन, स्वीकारो हे! मोरवीनंदन...
मझधार में मैं अटका, मुझको तारो मोरवीनंदन...
मुझको तारो मोरवीनंदन...



जय जय श्याम बाबा, जय जय श्याम बाबा...
जय जय श्याम बाबा, जय जय श्याम बाबा...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!


Saturday, 9 April 2011

!! तेरा भगत करे तन्ने याद श्याम, तन्ने आणो पड़सी रे... !!




हे! इष्टदेव, कुलदेव श्री श्यामधणी थारा द्वार पर खड्या थारा भोला ढाला टाबरिया था सु आं अरज करे ह...



तेरा भगत करे तन्ने याद श्याम, तन्ने आणो पड़सी रे...
ओ भोला टाबरिया ने भूल्या कईया सरसी रे...
साँवरा, भोला टाबरिया ने भूल्या कईया सरसी रे...



कईया सरसी रे, कईया सरसी रे साँवरा कईया सरसी रे...
ओ भोला टाबरिया ने भूल्या कईया सरसी रे...



जद जद म्हां पे आफत आवे, नाम तेरो ही भावे...
और कोई दुःख बांटे नाहि, तू ना देर लगावे...
या आफत म्हारी मुंह बाया, टाल्या सरसी रे...
ओ भोला टाबरिया ने भूल्या कईया सरसी रे...



घणी जगह स निगह करी, म्हाने सब या ही बतलावे...
खाटू वालो श्यामधणी तो, तेरी नैया पार लगावे..
ओ लीले असवार तन्ने तो, आणो पड़सी रे...
ओ भोला टाबरिया ने भूल्या कईया सरसी रे...



डग-मग डग-मग डोले नैया, सूझे नहीं किनारों..
श्याम धणी तेरे भक्तां ने, तेरो ही एक सहारो...
दास शरण ह थारी दाता, खेणी पड़सी रे...
ओ भोला टाबरिया ने भूल्या कईया सरसी रे...



तेरा भगत करे तन्ने याद श्याम, तन्ने आणो पड़सी रे...
ओ भोला टाबरिया ने भूल्या कईया सरसी रे...
साँवरा, भोला टाबरिया ने भूल्या कईया सरसी रे...



कईया सरसी रे, कईया सरसी रे साँवरा कईया सरसी रे...
ओ भोला टाबरिया ने भूल्या कईया सरसी रे...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!



श्री श्याम बाबा की इस अनुपम छवि के दर्शन श्री श्याम मंदिर, संतोषी नगर सिल्लीगुड़ी, पश्चिम बंगाल के है...

Thursday, 7 April 2011

!! कही डूब न जाये बाबा, अब तो आके सुध ले ले... !!




हे! निज भगतो की जीवन रूपी नैया के खेवनहार इष्टदेव, कुलदेव श्री श्याम बाबा, आज आपके द्वार पे खड़े आपके चरणों के इस सेवक की आपसे ह्रदय से यह करवद्ध प्रार्थना है, कि




मेरी नाव भँवर में डोले, डग-मग खाये हिचकोले...
कही डूब न जाये बाबा, अब तो आके सुध ले ले...
मेरी नाव भँवर में डोले, डग-मग खाये हिचकोले...
कही डूब न जाये बाबा, अब तो आके सुध ले ले...



श्याम आओ, श्याम आओ, श्याम आओं, श्याम...
श्याम आओ, श्याम आओ, श्याम आओं, श्याम...



लाचार हुई है बांहे, पतवार सम्हल न पाये..
बिन तेरे कौन दयालु, मेरी कश्ती पार लगाये...
ईक अनजानी चिंता में, मन खोया होले-होले...
कही डूब न जाये बाबा, अब तो आके सुध ले ले...



श्याम आओ, श्याम आओ, श्याम आओं, श्याम...
श्याम आओ, श्याम आओ, श्याम आओं, श्याम...



मजबूर हुआ हूँ कितना, जग को कैसे बतलाऊं...
दिल चोर नहीं है मेरा, कैसे विश्वास दिलाऊं...
मेरी बंद पड़ी किस्मत के, अब तू ही खोले ताले...
कही डूब न जाये बाबा, अब तो आके सुध ले ले...



श्याम आओ, श्याम आओ, श्याम आओं, श्याम...
श्याम आओ, श्याम आओ, श्याम आओं, श्याम...



तेरी दातारी के किस्से, दुनिया से सुने है दाता...
अब महर करे तो जाणु, हारे का तू साथ निभाता...
तेरा 'हर्ष' अकेला कह दे, दुःखड़ो को कैसे झेले...
तेरा भगत अकेला कह दे, दुःखड़ो को कैसे झेले...
कही डूब न जाये बाबा, अब तो आके सुध ले ले...



श्याम आओ, श्याम आओ, श्याम आओं, श्याम...
श्याम आओ, श्याम आओ, श्याम आओं, श्याम...



मेरी नाव भँवर में डोले, डग-मग खाये हिचकोले...
कही डूब न जाये बाबा, अब तो आके सुध ले ले...
मेरी नाव भँवर में डोले, डग-मग खाये हिचकोले...
कही डूब न जाये बाबा, अब तो आके सुध ले ले...



श्याम आओ, श्याम आओ, श्याम आओं, श्याम...
श्याम आओ, श्याम आओ, श्याम आओं, श्याम...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!



भजन : "श्री विनोद जी अग्रवाल"

Sunday, 3 April 2011

!! ओ श्याम तेरे चरणों की, गर धुल जो मिल जाये... !!




हे इष्टदेव, कुलदेव श्री श्याम जी आपके श्री चरणों में नित निरंतर आपके इस दास की केवल यही एक अरदास है, कि



ओ श्याम तेरे चरणों की, गर धुल जो मिल जाये...
ओ बाबा तेरे चरणों की, गर धुल जो मिल जाये...
सच कहता हूँ मेरी, तकदीर बदल जाये...
सच कहता हूँ मेरी, तकदीर बदल जाये...
ओ बाबा तेरे चरणों की...



सुनता हूँ तेरी रहमत, दिन रात बरसती रहती है...
एक बूंद जो मिल जाये, दिल की कली खिल जाये...
ओ श्याम तेरे चरणों की, गर धुल जो मिल जाये...
सच कहता हूँ मेरी, तकदीर बदल जाये...
ओ बाबा तेरे चरणों की...



ये मन बड़ा चंचल है, कैसे तेरा भजन करूँ...
जितना इसे समझाऊँ, उतना ही मचल जाये...
ओ श्याम तेरे चरणों की, गर धुल जो मिल जाये...
सच कहता हूँ मेरी, तकदीर बदल जाये...
ओ बाबा तेरे चरणों की...



नजरो से गिराना ना, चाहे जितनी भी सजा देना...
नजरो से जो गिर जाये, मुश्किल है सम्हल पाये...
ओ श्याम तेरे चरणों की, गर धुल जो मिल जाये...
सच कहता हूँ मेरी, तकदीर बदल जाये...
ओ बाबा तेरे चरणों की...



बाबा इस 'जीवन' की, बस एक तमन्ना है...
तुम सामने हो मेरे, और प्राण निकल जाये....
ओ श्याम तेरे चरणों की, गर धुल जो मिल जाये...
सच कहता हूँ मेरी, तकदीर बदल जाये...
ओ बाबा तेरे चरणों की...



ओ श्याम तेरे चरणों की, गर धुल जो मिल जाये...
ओ बाबा तेरे चरणों की, गर धुल जो मिल जाये...
सच कहता हूँ मेरी, तकदीर बदल जाये...
सच कहता हूँ मेरी, तकदीर बदल जाये...
ओ बाबा तेरे चरणों की...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!



भजन : "श्री जीवन कुमार जी"

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