/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\!! श्री गणेशाय नमः !!/\/\/\/\/\!! ૐ श्री श्याम देवाय नमः !!\/\/\/\/\!! श्री हनुमते नमः !!/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\

Tuesday, 26 July 2011

!! किसी का तुझे जब सहारा ना हो, जहां में कोई जब तुम्हारा ना हो... !!


  
इस संसार सागर में सभी प्रकार से हारे हुये अपने निज भक्तों से इष्टदेव, कुलदेव, खाटूपति श्री श्याम बाबा के ये  कौल वचन है...




किसी का तुझे जब सहारा ना हो, जहां में कोई जब तुम्हारा ना हो...
तब तुम शरण मेरी आ जाना रे, मेरा दर खुला है, खुला ही रहेगा...
तुम्हारे लिये, ऐ हारे हुये... तुम्हारे लिये, ऐ हारे हुये...



मिली जो ज़माने से ठोकर तुझे, गले अपने प्यारे लगा लूँगा मैं...
किया तेरे अपनों ने रुसवा अगर, तुझे अपना प्यारे बना लूँगा मैं...
झुकना तुझे गर गंवारा ना हो, अकेले में तेरा गुजारा ना हो...
तब तुम शरण मेरी आ जाना रे, मेरा दर खुला है, खुला ही रहेगा...
तुम्हारे लिये, ऐ हारे हुये... तुम्हारे लिये, ऐ हारे हुये...



नहीं काम तेरे कोई आयेगा, मुसीबत में साथी बनूँगा तेरा...
भँवर में अगर नाँव फँस जाये तो, मेरा नाम दिल से पुकारो जरा...
जब कश्ती का कोई किनारा ना हो, मांझी जो कोई तुम्हारा ना हो...
तब तुम शरण मेरी आ जाना रे, मेरा दर खुला है, खुला ही रहेगा...
तुम्हारे लिये, ऐ हारे हुये... तुम्हारे लिये, ऐ हारे हुये...



किसी दीन का तु जो साथी बने, तुझे साथ मेरा भी मिल जायेगा...
अगर 'हर्ष' स्वार्थ का पुतला बना, अकेला तु खुद को अरे पायेगा...
किस्मत का रोशन सितारा ना हो, किसी ने भी मुड़के पुकारा ना हो...
तब तुम शरण मेरी आ जाना रे, मेरा दर खुला है, खुला ही रहेगा...
तुम्हारे लिये, ऐ हारे हुये... तुम्हारे लिये, ऐ हारे हुये...



किसी का तुझे जब सहारा ना हो, जहां में कोई जब तुम्हारा ना हो...
तब तुम शरण मेरी आ जाना रे, मेरा दर खुला है, खुला ही रहेगा...
तुम्हारे लिये, ऐ हारे हुये... तुम्हारे लिये, ऐ हारे हुये...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!



भजन : "श्री विनोद अग्रवाल जी"

Tuesday, 12 July 2011

!! थाणे परदे में राखां जी बाबा श्याम, नजर लग जावेली... !!


आज म्हारा इष्टदेव, कुलदेव श्याम जी की आषाढ़ शुक्लपक्ष की द्वादशी है... और मंदिरिये में बैठ्या बाबा श्याम जी रो अनुपम श्रृंगार ने निरख निरख सगळा भक्तां रो मनरो हुलस हुलस कर बाबा श्याम जी इसप्रकार कहवे ह...




"नुण-राई वारो, जी निजरा उतारो"
"नुण-राई वारो, जी निजरा उतारो"




थाणे परदे में राखां जी बाबा श्याम, नजर लग जावेली...
थाणे परदे में राखां जी बाबा श्याम, नजर लग जावेली...




जिसने थाणे सजाया बाबा, सुन्दर खूब सजाया...
ऊपर से थारे भक्तों ने, केशर चन्दन लगाया...
बुरी नजरां स बचावां थाणे श्याम, नजर लग जवेली...
थाणे परदे में राखां जी बाबा श्याम, नजर लग जावेली...




"नुण-राई वारो, जी निजरा उतारो"
"नुण-राई वारो, जी निजरा उतारो"




बाबा थारो रूप निरालो, भगतां रे मन भावे...
म्हारे घरां ले चालां थाणे, म्हारे मन में आवे...
ओ सारी दुनिया म, घुमास्यां थाणे श्याम, नजर लग जावेली...
थाणे परदे में राखां जी बाबा श्याम, नजर लग जावेली...




"नुण-राई वारो, जी निजरा उतारो"
"नुण-राई वारो, जी निजरा उतारो"




नजरां बचाकर रहिये बाबा, मत ना नैन मिलाज्ये...
'बनवारी' कोई बात करे तो, ज्यादा मत बतलाज्ये...
अपणों जानकार समझावां थाणे श्याम, नजर लग जावेली...
थाणे परदे में राखां जी बाबा श्याम, नजर लग जावेली...




"नुण-राई वारो, जी निजरा उतारो"
"नुण-राई वारो, जी निजरा उतारो"




थाणे परदे में राखां जी बाबा श्याम, नजर लग जावेली...
थाणे परदे में राखां जी बाबा श्याम, नजर लग जावेली...




!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!





भजन : "श्री जयशंकर जी"


श्री श्याम बाबा की छवि के ये अनुपम दर्शन श्री श्याम मंदिर, 'श्यामकुञ्ज', दरभंगा के है...

Sunday, 3 July 2011

!! साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार... !!


हे इष्टदेव, हे म्हारा कुल का देवता श्यामधणी, थारे द्वारे पर खड्यो थारो सेवाकियो थां सु या अरज करे ह...





साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार, बाबा ध्यान रखना...
साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार, बाबा ध्यान रखना...




घुम्यो सारी दुनिया, मिल्यो न कोई साथी, जो कहवे अपना...
संता स सुनी ह, सांचो एक ह साथी, श्री श्याम अपना..
श्री श्याम अपना, जग जूठा सपना...



साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार, बाबा ध्यान रखना...
साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार, बाबा ध्यान रखना...




बाबा थारो टाबर, बड़ो ही दुखियारो, सतावे ह जहां...
थे ही मेरा सब कुछ, पिता और माता, मैं जाऊँगा कहाँ...
मैं जाऊँगा कहाँ, बस रहूंगा यहाँ...




साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार, बाबा ध्यान रखना...
साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार, बाबा ध्यान रखना...




लाखां का बनाया हो, मेरा भी संवारोगा, कारज जरुर....
मेरी छोटी नैया, खावे है हिचकोला, ओ मेरे हजूर...
ओ मेरे हजूर, माफ करना कसूर...




साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार, बाबा ध्यान रखना...
साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार, बाबा ध्यान रखना...




फूला स सजावां, थारी या फुलवाड़ी, पधारो म्हारा श्याम...
भगतां बीच बैठो, सुनो थे सै की अरजी, जो लेवे थारो नाम..
जो लेवे थारो नाम, श्री श्याम श्याम श्याम...




साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार, बाबा ध्यान रखना...
साँचो थारो दरबार, सेवक आयो थारे द्वार, बाबा ध्यान रखना...




!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!


श्री श्याम बाबा की यह अनुपम छवि "श्री श्याम मंदिर, दरभंगा, बिहार" की है...
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