/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\!! श्री गणेशाय नमः !!/\/\/\/\/\!! ૐ श्री श्याम देवाय नमः !!\/\/\/\/\!! श्री हनुमते नमः !!/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\

Monday, 28 February 2011

!! जय जय जय श्री बाबा श्याम, पूरण काम बनाने वाले... !!



हे! खाटूनाथ प्रभु श्याम जी आपकी महिमा जगत से निराली है, इसलिए तो आपके भगत आपके चरित्र का गुणगान करते हुए अपने हृदय के ये अनुपम भाव आपके श्री चरणों में अर्पित करते हुए कहते है, कि...




जय जय जय श्री बाबा श्याम, पूरण काम बनाने वाले...
जय जय जय श्री बाबा श्याम, पूरण काम बनाने वाले...



अपने निज भगतों के काज, पल में धारयो जी अवतार...
करके दुष्टों का संहार, जग को धीर बंधाने वाले..
जय जय जय श्री बाबा श्याम, पूरण काम बनाने वाले...



मांग्यो निज मुख से जगदीश, दानी दिन्या अपणो शीश...
नारद शारद रटे फनीश, थक गये हरि गुण गाने वाले...
जय जय जय श्री बाबा श्याम, पूरण काम बनाने वाले...  



जग में थारी ज्योत प्रचण्ड, महिमा व्यापक है नौखण्ड...
खल को बार बार दो दण्ड, दुःख में प्राण बचाने वाले...
जय जय जय श्री बाबा श्याम, पूरण काम बनाने वाले... 



लोभ, काम छोड़ श्री श्याम जी का दास हो...
मुक्त हो संसार से वैकुण्ठ उसका वास हो...



सलोने श्याम की झांकी, अजब सबसे निराली है...
किशोरचंद्र की सूरत, प्रेम पिंजरे की ताली है...



समाई जिसके दिल अंदर, सलोनी सांवरी सूरत...
बना के हृदय मैं मंदिर, श्याम मूर्ति बिठा ली है...



जय जय जय श्री बाबा श्याम, पूरण काम बनाने वाले...
जय जय जय श्री बाबा श्याम, पूरण काम बनाने वाले...



लगाये रोज हृदय में श्री श्याम की झांकी...
करे नित आरती खुश हो, चरण में प्रेम लाती है...



करोड़ो तर गये पापी, प्रभु के दर्शन करने से...
भिखारी माँगनियो भी है, चरण कमलों की थाली है...



कलयुग केवल श्याम की महिमा है नौखण्ड...
भगतों की रक्षा करे, दुष्टों को दे दण्ड..  



जय जय जय श्री बाबा श्याम, पूरण काम बनाने वाले...
जय जय जय श्री बाबा श्याम, पूरण काम बनाने वाले...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!




भाव की रचियता : "श्रीमती आनंदी शारदा माता जी"

Friday, 25 February 2011

!! सच्चे दिल से श्याम पुकारो, रुक नही पायेगा... !!




भगवान सर्व समर्थ होते हुए भी अपने निज भक्तों से दूर होने में असमर्थ है... इसलिए जब कोई भक्त अपने आराध्य, अपने इष्ट को सच्चे मन से उनका नाम लेकर पुकारता है, तो भगवन अपने आप को रोक नही पाते और अपने भक्त के पास उसे गले लगाने दौड़े चले आते है... इसलिए कहते है, कि...




बाबा आयेगा, मेरा बाबा आयेगा...
बाबा आयेगा, मेरा  बाबा आयेगा...
सच्चे दिल से श्याम पुकारो, रुक नही पायेगा...
सच्चे दिल से श्याम पुकारो, रुक नही पायेगा...
बाबा आयेगा, मेरा बाबा आयेगा...



वो दिन भी आयेगा, श्याम जब आयेगा...
दीन बंधू हम पर, दया बरसायेगा...
कलयुग का अवतार श्याम, हमें गले लगायेगा...
सच्चे दिल से श्याम पुकारो, रुक नही पायेगा...
बाबा आयेगा, मेरा बाबा आयेगा...



ये अपने भक्तों के, नही दुःख देख सके..
ये उनसे मिलने से, न खुद को रोक सके...
दुःख का साथी श्यामबाबा, साथ निभायेगा...
सच्चे दिल से श्याम पुकारो, रुक नही पायेगा...
बाबा आयेगा, मेरा बाबा आयेगा...



सहारा बनता है, हारने वालो का..
मुकद्दर बनता है, मानने वालो का...
'शिब' हारे के साथी का, जयकार लगायेगा...
सच्चे दिल से श्याम पुकारो, रुक नही पायेगा...
बाबा आयेगा, मेरा बाबा आयेगा...



बाबा आयेगा, मेरा बाबा आयेगा...
बाबा आयेगा, मेरा बाबा आयेगा...
सच्चे दिल से श्याम पुकारो, रुक नही पायेगा...
सच्चे दिल से श्याम पुकारो, रुक नही पायेगा...
बाबा आयेगा, मेरा बाबा आयेगा...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!


भजन : "श्री शिब अग्रवाल जी"
श्री श्याम बाबा के ये अनुपम दर्शन "श्री श्याम मंदिर, गैंगेज गार्डन, शिबपुर, हावड़ा" के है...

Monday, 21 February 2011

!! बैठ्यो सांवरियों मंदिर म प्रीत का तीर चलावे ह... !!




म्हारा सुन्दर सलोना साँवरिया श्यामबिहारी जी री शोभा ही जग सु न्यारी ह... श्री मंदिर में बैठ्या म्हारा साँवरिया सरकार अपने निज भगतां क ऊपर प्रीत रा तीर चला चला कर निज प्रेम म घायल कर देवे ह और फिर सारा भगतां हिल मिल अपने साँवरिया बाबा श्यामधणी स यु कहवे है...



बैठ्यो सांवरियों मंदिर म प्रीत का तीर चलावे ह, बैठ्यो सांवरियों...
ओ हो, बैठ्यो सांवरियों मंदिर म प्रीत का तीर चलावे ह, बैठ्यो सांवरियों...
तीर चलावे ह, बाबो तीर चलावे ह,  बैठ्यो सांवरियों...



सीधो साधो, भोलो लागे, पहल्याँ श्याम हमारो जी...
मीठी सी मुस्कान दिखा यो, जी उलझावे ह,  बैठ्यो सांवरियों...
बैठ्यो सांवरियों मंदिर म प्रीत का तीर चलावे ह, बैठ्यो सांवरियों...



नित नया रूप दिखावे बाबो, पक्को जादुगारो जी...
मन को मौजी सांवरियों म्हाने, घणों छ्कावे ह,  बैठ्यो सांवरियों... 
बैठ्यो सांवरियों मंदिर म प्रीत का तीर चलावे ह, बैठ्यो सांवरियों...



जंच जासी तो बात करे यो, वरना रुख नही जोड़े जी...
छोटी- छोटी बातां पर भी, यो इतरावे ह, बैठ्यो सांवरियों... 
बैठ्यो सांवरियों मंदिर म प्रीत का तीर चलावे ह, बैठ्यो सांवरियों...



प्रेम जगाकर यु छिटकाणो, श्याम समझ नही आवे जी...
'नंदू'  हेत श्याम जद जाग्यो, क्यूँ तरसावे ह, बैठ्यो सांवरियों... 
बैठ्यो सांवरियों मंदिर म प्रीत का तीर चलावे ह, बैठ्यो सांवरियों...



बैठ्यो सांवरियों मंदिर म प्रीत का तीर चलावे ह, बैठ्यो सांवरियों...
ओ हो, बैठ्यो सांवरियों मंदिर म प्रीत का तीर चलावे ह, बैठ्यो सांवरियों...
तीर चलावे ह, बाबो तीर चलावे ह,  बैठ्यो सांवरियों...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!



भजन : "श्री नंदू जी"


श्री श्यामबाबा के श्री चरणों में समर्पित यह अनुपम भाव राजस्थानी लोक गीत "धमाल" के तर्ज़ पर आधारित है...


श्री श्याम बाबा के यह अनुपम दर्शन ओडिशा प्रांत के भटली धाम के है, जहाँ बाबा श्यामधणी अपने आलौकिक बालरूप में विराजित हो अपने भगतों को दर्शन देते है....


बाबा श्याम के भटली धाम के श्री मंदिर के बारे में जानने के लिये आप सभी नीचे दिये गयी लिंक पर क्लिक कर सकते है...
 


!! जय श्री श्याम  !!

Sunday, 20 February 2011

!! अरदास हमारी है, आधार तुम्हारा है... !!




हे कलिकाल में सर्वत्र पूजित देव श्री श्यामधणी, आपको बारम्बार प्रणाम है...


हे माता मोरवी की कोख के राजहंस भगवन्, आपको बारम्बार प्रणाम है


हे श्री कृष्णजी के उपदेश से गुप्तक्षेत्र में देवियों की आराधना से अतुलित बल पाने वाले देव, आपको बारम्बार प्रणाम है...


हे हारे के सहारे, अपने समस्त भक्तों के परम प्रिय, एक मात्र जीवन आधार, आपको बारम्बार प्रणाम है...


हे इष्टदेव, कुलदेव श्री श्यामबाबा, आपके श्री चरणों में हमारा कोटि कोटि प्रणाम है...





अरदास हमारी है, आधार तुम्हारा है...
स्वीकार करो बाबा, प्रणाम हमारा है...
अरदास हमारी है, आधार तुम्हारा है...
स्वीकार करो बाबा, प्रणाम हमारा है...



नयनों में रमे हो तुम, मेरे दिल में बसे हो तुम...
तुम्हे पल भी ना बिसराऊ, इस तन में रंगे हो तुम...
मत मुझसे बिछड़ जाना, ये दास तुम्हारा है...
स्वीकार करो बाबा, प्रणाम हमारा है...



अरदास हमारी है, आधार तुम्हारा है...
स्वीकार करो बाबा, प्रणाम हमारा है...



अरजी स्वीकार करो, भवसागर पार करो...
सिर हाथ फिरा करके, मेरा उद्धार करो...
गिरते को उठाना तो, बाबा काम तुम्हारा है...
स्वीकार करो बाबा, प्रणाम हमारा है...



अरदास हमारी है, आधार तुम्हारा है...
स्वीकार करो बाबा, प्रणाम हमारा है...



कहते है तेरे दर पर, तक़दीर संवरती है...
जो डूबने वाली हो, वो नाव उबरती है...
दर दर पे भटकता हूं, तक़दीर का मारा हूं...
स्वीकार करो बाबा, प्रणाम हमारा है...



अरदास हमारी है, आधार तुम्हारा है...
स्वीकार करो बाबा, प्रणाम हमारा है...
अरदास हमारी है, आधार तुम्हारा है...
स्वीकार करो बाबा, प्रणाम हमारा है...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!




श्री श्यामधणी की यह अनुपम छवि "श्री श्याम सेवक कल्याण संघ, श्री गंगानगर, राजस्थान" के श्री श्याम महोत्सव की है... 

!! श्री मोरवीनंदन खाटू श्याम जी अष्टकम !!



!! श्री मोरवीनंदन खाटू श्याम जी अष्टकम !!


शास्त्रों में अष्टकम स्तुति परम पवित्र एवं कल्याणकारी मानी गयी है... जिसमे साधक अपने आराध्य की स्तुति अष्ट पदों के माध्यम से करते है... आइये हम सभी श्री मोरवीनंदन श्यामधणी खाटू वाले की पावन स्तुति ब्रह्मर्षि श्री वेदव्यास जी द्वारा रचित स्कन्दपुराण के कौमारिका खंड के ६६वे अध्याय में उक्त "श्री श्यामदेव स्त्रोत्र" पर आधारित "श्री मोरवीनंदन खाटू श्याम जी अष्टकम" के माध्यम से करे एवं अपने आराध्य श्री श्याम बाबा की परम कृपा प्राप्त करे..."




---------------------------: दोहा :---------------------------


गुरु गणपति शारद शरण नौमि श्याम दिन रैन !
अष्टक सत चित्त सुमिरण प्रदत सकल सुख चैन !!
खाटू दर कलिमल हरण विपत विमुच मृदु वैन ! 
विप्लव वन्दक प्रभु चरण सदय हरत हरि दैन !!


---------------------------: चौपाई :--------------------------


जय यक्षप कुल कोटि चौरासी, सूर्यवर्च अधिपति अविनासी !
जयति प्रताप प्रखर बलबंता, किस बिध विरद बखानु अनंता !!



जय प्रवृत्त हरण भूमि भारा, अल्प श्राप नैर्ॠत तनु धारा !
जयति कामकण्टकटा जाया, मोर्विकुक्षि राजहंस कहाया !!



जय घटोत्कच मुद वर्धमाना, बर्बरीक प्रसिद्ध अविधाना !
जयति कृष्ण आज्ञा परिपालक, गुप्त क्षेत्र देवी आराधक !!



जय नव चण्डी शक्ति स्वरूपा, अर्जित अतुलित वीर्य अनूपा !
जयति विप्र विजय सिद्धि दायक, चण्डिल नाम वीर वर पायक !!



जय वैष्णव वैतरणी तारक, नव कोटि पलाशी संहारक !
जयति द्रुहद्रुह दैत्या मारक, पिङग्ल रेपलेन्द्र वध कारक !!



जय बली भीम मान विदारक, नाग कन्या वरण परिहारक !
जयति भैमिसुत निधि सुखचैना, अति प्रवृत्त वध कौरव सेना !!



जय यदुपति वर लब्ध प्रतापा, दात्र सकल वर हर भव तापा !
जयति श्याम कलि वन्दित देवा, बड भागी जन पावत सेवा !!



जय श्री श्याम भक्त पत राखत, मोहन मनोज विप्लव याचत !
जयति भक्त वत्सल भगवाना, रक्षा करो प्रभु कृपा निधाना !!


---------------------------: दोहा :--------------------------


नित्य श्याम अष्टक पढ़े उर आनन्द हमेश !
सकल सुख आरोग्य बढ़े मोर्वेय हरत क्लेश !!
निज भक्त पर दया द्रवे दीन दु:खी हितेश !
अष्ट सिद्धि नव निधि प्रदे जयति खाटू नरेश !!


------------------------: इति श्री :----------------------



रचियता : "श्री  मनोज विप्लव"


!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!

Saturday, 19 February 2011

!! कौन सुनेगा किसको सुनाऊं, किसलिए चुप बैठे हो... !!




आज जीवन की इस आपा-धापी में घिरा हुआ  अत्यंत ही करुण अवस्था में एक भक्त अपने आराध्य श्री श्याम बाबा की शरणागत हो एवं अपने अंतर्मन से  अपने आराध्य को अपना सखा, अपना बंधू, अपना सर्वस्व समझ कर अपनी हृदय की वेदना को श्री श्याम बाबा से  इसप्रकार अभिव्यक्त करता है...




कौन सुनेगा किसको सुनाऊं, किसलिए चुप बैठे हो...
छोड़ तुझे मैं किस दर जाऊं, किसलिए चुप बैठे हो...
कौन सुनेगा किसको सुनाऊं, किसलिए चुप बैठे हो...
किसको दिल का दर्द बताऊं, किसलिए चुप बैठे हो...



मेरी हालत देख जरा तू, आँख उठा करके बाबा...
मैं तो तेरी शरण पड़ा हूँ, क्यू मुझको तू बिसराता...
मेरी खता क्या, इतना बता दो, किसलिए चुप बैठे हो...
कौन सुनेगा किसको सुनाऊं किसलिए चुप बैठे हो...



क्या मैं इतना जान लूँ मुझको, समझा तुने बेगाना...
वरना दिल के घाव तुझे क्या  पड़ता बाबा दिखलाना...
दर्द बड़े है, अब तो दवा दो, किसलिए चुप बैठे हो...
छोड़ तुझे मैं किस दर जाऊं, किसलिए चुप बैठे हो...



दुःख में कोई साथ ना देता, कैसे तुझको समझाऊं...
'हर्ष' तेरे बिन कौन सुनेगा, किसको जाके बतलाऊं...
अपने भगत से कुछ तो बोलो, किसलिए चुप बैठे हो...
कौन सुनेगा किसको सुनाऊं किसलिए चुप बैठे हो...



कौन सुनेगा किसको सुनाऊं, किसलिए चुप बैठे हो...
किसको दिल का दर्द बताऊं, किसलिए चुप बैठे हो...
कौन सुनेगा किसको सुनाऊं, किसलिए चुप बैठे हो...
छोड़ तुझे मैं किस दर जाऊं, किसलिए चुप बैठे हो...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!




भाव के रचियता :  "श्री विनोद जी अग्रवाल जी"

Friday, 18 February 2011

!! धन्य घड़ी धन्य भाग्य हमारा, लीले चढ़ श्री श्याम पधारां... !!





श्री श्याम प्रभु खाटू वाले के भक्तगण प्रत्येक मास की च्यानणी ग्यारस की रात्रि को बाबा श्री श्यामधणी की ज्योति जगाकर कीर्तन करते है और बारस को धोक लगाते है... कीर्तन में, बाबा श्याम के प्रेम में वशीभूत  सभी श्यामप्रेमी  भजनों के सुमधुर भावों के प्रवाह  से अपने अंतर्मन में श्री श्यामधणी का श्री सानिध्य का अनुभव करते हुए भाव विभोर हो इसप्रकार अपने मन के भाव को श्याम बाबा के श्री चरणों में अर्पित करते है...



धन्य घड़ी धन्य भाग्य हमारा, लीले चढ़ श्री श्याम पधारां...
करो स्वागत बाबा को, करो स्वागत बाबा को...
धन्य घड़ी धन्य भाग्य हमारा, लीले चढ़ श्री श्याम पधारां...
करो स्वागत बाबा को, करो स्वागत बाबा को...



चंदन चौकी ल्याया जी, म्हे गंगाजल मँगवाया जी...
बैठ्यो म्हारा श्यामधणी, थारां भगतां ने बुलवाया जी...
धीरे धीरे चरण पखारां, श्यामधणी की आरती उतारां...
करो स्वागत बाबा को, करो स्वागत बाबा को...



धन्य घड़ी धन्य भाग्य हमारा, लीले चढ़ श्री श्याम पधारां...
करो स्वागत बाबा को, करो स्वागत बाबा को...



सबको मनरो मोह लियो ह, रूप सजिलो बाबा को...
भगतां ने प्यारो लागे ह, लीलो घोड़ों बाबा को...
नुण राई वारां जी वारां, श्यामधणी की नजर उतारां...
करो स्वागत बाबा को, करो स्वागत बाबा को...



धन्य घड़ी धन्य भाग्य हमारा, लीले चढ़ श्री श्याम पधारां...
करो स्वागत बाबा को, करो स्वागत बाबा को...



आज बड़ो ही शुभ दिन ह, श्याम धणी घर आया जी...
भजन करो सच्चे दिल से, यो संदेशो ल्याया जी...
'बनवारी' को कहनो ह, श्याम शरण म रहनो ह...
करो स्वागत बाबा को, करो स्वागत बाबा को...



धन्य घड़ी धन्य भाग्य हमारा, लीले चढ़ श्री श्याम पधारां...
करो स्वागत बाबा को, करो स्वागत बाबा को...
धन्य घड़ी धन्य भाग्य हमारा, लीले चढ़ श्री श्याम पधारां...
करो स्वागत बाबा को, करो स्वागत बाबा को...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!


भजन : "श्री जयशंकर जी चौधरी"


श्री श्यामबाबा की यह अनुपम एवं मनमोहक छवि श्री श्री श्यामबाबा की परम भक्त्या सुश्री आनंदी शारदा माता जी, जयपुर के निज निवास की है, जिन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन श्री श्याम बाबा की सेवाभक्ति में समर्पित किया...


सभी श्याम प्रेमियों के दर्शनार्थ श्री श्याम बाबा की यह सुन्दर छवि मुझे श्री अनुपम बंसल जी ने प्रेषित की है...

!! माता मोरवी को लाल, लील घोड़े पे असवार... !!



कितना धन्य है वह पावन "ढूंढा रो देश",  जहाँ की खाटू नगरी में प्यारे श्याम सरकार साक्षात् देव स्वरुप में विराजित है... आइये ऐसे सुन्दर, सलोनी सूरत वाले श्री श्यामधणी, लखदातार, तीन बाणधारी, लीले घोड़े के असवार को इन नयनो से निहारते हुए, ये भावपूरित श्रद्धा सुमन उनके श्री चरणों में अर्पित करते है...  




धन्य धन्य ह ढूंढा रो देश, जांकी महिमा अपरम्पार...
बन्यो ऐसो सुन्दर धाम, जिसने जाने सब संसार...
खाटू नगरी म विराजे, ओ खाटू नगरी म विराजे...
म्हारो श्याम सरकार...



माता मोरवी को लाल, लील घोड़े पे असवार...
इन री हो रही जय जयकार, इन रो नाम ह लखदातार...
खाटू नगरी म विराजे, ओ खाटू नगरी म विराजे...
म्हारो श्याम सरकार...



भक्तां ले करके निशान, जावे श्यामधणी के द्वार...
इनकी एक नजर हो जावे तो, भक्तां रो बेड़ो पार...
खाटू नगरी म विराजे, ओ खाटू नगरी म विराजे...
म्हारो श्याम सरकार...



आवे जब यो फाल्गुण मास, उमड़े मन आनंद अपार...
चालां चालां खाटू धाम, देखा मेले री बहार..
खाटू नगरी म विराजे, ओ खाटू नगरी म विराजे...
म्हारो श्याम सरकार...



म्हारा श्यामधणी रो रूप, लेज्यो नयना स निहार...
देवे श्याम धणी तो पल म उन रा, सारा कष्ट निवार...
खाटू नगरी म विराजे, ओ खाटू नगरी म विराजे...
म्हारो श्याम सरकार...



धन्य धन्य ह ढूंढा रो देश, जांकी महिमा अपरम्पार...
बन्यो ऐसो सुन्दर धाम, जिसने जाने सब संसार...
खाटू नगरी म विराजे, ओ खाटू नगरी म विराजे...
म्हारो श्याम सरकार...



!! सुन्दर सलोनी सूरत वाले बाबा श्याम की जय हो !!
!! माता मोरवी के लाल बाबा श्याम की जय हो !!
!! लीले घोड़े के असवार बाबा श्याम की जय हो !!



उपरोक्त भाव में एक शब्द "ढूंढा रो देश" आया है... कहा जाता है, यह वही दग्ध स्थल है, जहा ढूंढा जलकर भस्म हुई थी, ढूंढा दानवराज हिरण्यकश्यप की बहन होली को ही कहते है... और मान्यता के अनुसार यह वही क्षेत्र है जहाँ, उसने देवताओं से प्राप्त अग्नि में न जलने के वरदान से भक्त प्रहलाद को अग्नि में जलाकर भष्म करने की कोशिश कि, परन्तु श्री हरि के भक्त को कौन मार पाया है... अंतत:, दुष्टा ढूंढा (होली) अपने वरदान के गलत प्रयोग करने के कारण स्वयं ही अग्नि में जलकर भष्म हो गयी...



और इसी घटना के प्रतिक में आज तक हम लोग ढूंढा पूजन कर उसे दहते है... और तब से यह क्षेत्र ढूंढारी कहलाने लगा, इसी क्षेत्र में खट्वा नाम की नगरी थी... जहा बाबा श्याम का शीश पवित्र श्याम कुण्ड से प्रकट हुआ था, और अब यह खट्वा नगरी बाबा श्याम की कृपा से, खाटू श्याम जी के नाम से जानी जाती है...



श्री श्याम बाबा की स्तुति में भी "ढूंढा रो देश" का नाम आता है...


"धन्य ढूंढा रो देश है, खाटू नगर सुजान...
अनुपम छवि श्री श्याम की, दर्शन से कल्याण..."



 नई दिल्ली के परम श्याम भक्त श्री श्री विश्वनाथ जी "वशिष्ठ " जी ने इस क्षेत्र की महिमा का गुणगान करते हुए "श्री श्याम चरित्र" के अष्टम सौपान में इसप्रकार लिखा है कि...



दग्ध स्थल ही है ढूंढारी, ढूंढा जहाँ गई थी मारी...
ढूंढा को ही होली कहते, है प्रतिक में होली दहते...



भक्त प्रहलाद को मारण ताई, हिरणाकुश ने ढूंढा बुलाई...
ढूंढा आग से डरती नहीं थी, कभी आग से जलती नहीं थी...



भक्त प्रह्लाद था भक्ति करता, हिरणाकुश इसलिए था चिढता...
नहीं माना तो ढूंढा बुलाई, बिठा गोद में आग लगाईं...



जल गई वो प्रह्लाद बचा था, भक्त हरि का वो सच्चा था...
वो वरदान ही श्राप हो गया, दुष्टा को यूँ ताप मिल गया...
जब से ढूंढा गई थी मारी, क्षेत्र यह तब से हुआ ढूंढारी ...



!! तब से दग्ध स्थल हुआ, ढूंढारी प्रचार !!
!! अपभ्रंश से फिर हुआ, क्षेत्र यही ढूंढार !!



क्षेत्र ढूंढार में खटवा नगरी, सुखी संतोषी प्रजा थी सगरी...
कालांतर की खटवा नगरी, अब कहलाती खाटू नगरी...



नगर यही अब धाम हुआ है, गाँव ये खाटू श्याम हुआ है...
जग में श्याम की ज्योति चमके, श्यामदेव की महिमा महके...



देश-देश के सब जन आते, जात जडुला धोक लगाते...
हर दिन मेला सा रहता है, खाटू धाम भरा रहता है...



मनोकामना सब लाते है, पूरण श्याम सभी करते है...
श्याम निशान सदा चढ़ते है, भक्त भाव से नित लाते है...



नर नारी बालक सब आते, दर्शन श्याम धणी का पाते...
सभी श्याम को धोक लगते, मगन होय कर शीश नवाते...



श्याम सदा भक्तन हितकारी, जहाँ प्रेम वह श्याम बिहारी...
मोरवी लाल बड़ा बलकारी, कलयुग का है भव भयहारी...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!


श्री श्यामधणी की यह अनुपम छवि श्री श्याम महोत्सव, कानपुर की है...


!! जय श्री श्याम !!

Wednesday, 16 February 2011

!! बैठ्या जो खाटू में उससे कहना है... !!



श्री श्याम प्रभु के प्रेम से पूरित एक प्रेमी का हृदय इस प्रकार खाटू धाम में बैठ्या अपने आराध्य श्री श्याम बाबा से अपने मन की कामना की अभिव्यक्ति करता है...




बैठ्या जो खाटू में उससे कहना है...
धारा में तेरी ही, मुझको बहना है...
सारी उमर तेरे संग रहना है...
बैठ्या जो खाटू में उससे कहना है...



बाबा मेरी आँखों से, होना ना तू दूर...
छाया रहे नयनों में, तेरा ही सुरूर...
मेरा श्रृंगार तू, तू ही गहना है...
धारा में तेरी ही, मुझको बहना है...



बैठ्या जो खाटू में उससे कहना है...
धारा में तेरी ही, मुझको बहना है...
सारी उमर तेरे संग रहना है...
बैठ्या जो खाटू में उससे कहना है...



भूखा जो सुलायेगा, सो जाऊँगा मैं..
जैसे भी तू राखेगा, रह जाऊँगा मैं...
सेवा में तेरी ही, डूबे रहना है...
धारा में तेरी ही, मुझको बहना है...



बैठ्या जो खाटू में उससे कहना है...
धारा में तेरी ही, मुझको हना है...
सारी उमर तेरे संग रहना है...
बैठ्या जो खाटू में उससे कहना है...



जैसा भी हूँ तेरा, तू मेरा चित्तचोर...
बाबा मैंने बाँधी है, तुझसे प्रेम की डोर...
तेरी प्रतीक्षा में, खोये मेरे नयना है...
धारा में तेरी ही, मुझको बहना है...



बैठ्या जो खाटू में उससे कहना है...
धारा में तेरी ही, मुझको बहना है...
सारी उमर तेरे संग रहना है...
बैठ्या जो खाटू में उससे कहना है...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!


 श्री श्याम बाबा की यह अनुपम छवि श्री श्याम महोत्सव, उदयपुर, राजस्थान की है...

Monday, 14 February 2011

!! ले लो चरण शरण में, आये हैं द्वार तुम्हारे... !!



आज श्री श्यामधणी खाटू वाले की पुनीत माघशुक्ल एकादशी की पावन बेला है... आज सभी श्याम प्रेमी अपने अपने घर में बाबा श्याम की पावन ज्योति जगाकर कल बारस की धोक लगायेंगे, आइये हम सब मिल अपने अंतर्मन में श्री श्याम नाम की ज्योत जगाकर बाबा श्यामधणी के श्री चरणों की वंदना करते हुए एवं पूर्ण समर्पण भाव से शरणागत हो उनसे यह अरज लगाते है... 




लेलो चरण शरण में, आये हैं द्वार तुम्हारे...
करेंगे सेवा तेरी, करेंगे सेवा तेरी, बालक है हम तो तुम्हारे...
लेलो चरण शरण में, आये हैं द्वार तुम्हारे...
लेलो चरण शरण में, आये हैं द्वार तुम्हारे...



घटोत्कच मोरवीनंदन, खाटू के श्याम बिहारी...
करें हम तेरा वंदन, कलयुग के भव-भयहारी...
दानी हो तुम दातारी, दानी हो तुम दातारी, हारे के हो सहारे...



लेलो चरण शरण में, आये हैं द्वार तुम्हारे...
करेंगे सेवा तेरी, करेंगे सेवा तेरी, बालक है हम तो तुम्हारे...



जग में है चर्चा तेरी, महिमा है तेरी भारी...
देव हो तुम बलकारी, भक्तों को हो हितकारी...
आते जो दर पे सवाली, आते जो दर पे सवाली, उनके तो वारे न्यारे...



लेलो चरण शरण में, आये हैं द्वार तुम्हारे...
करेंगे सेवा तेरी, करेंगे सेवा तेरी, बालक है हम तो तुम्हारे...



मांगू क्या तुमसे बोलो, तुम तो हो लाखदातारी...
मालिक हो स्वामी मेरे, चाहूँ मैं नज़र तुम्हारी...
'टीकम' जाये बलिहारी, 'टीकम' जाये बलिहारी, चरणों को तेरे निहारे...



लेलो चरण शरण में, आये हैं द्वार तुम्हारे...
करेंगे सेवा तेरी, करेंगे सेवा तेरी, बालक है हम तो तुम्हारे...
लेलो चरण शरण में, आये हैं द्वार तुम्हारे...
लेलो चरण शरण में, आये हैं द्वार तुम्हारे...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!



भजन : "श्री महाबीर जी"

Sunday, 13 February 2011

!! हारे का सहारा, मोरवीनंदन श्यामबाबा !!



!! जय मोरवीनंदन, जय बाबा श्याम !!




दरभंगा (बिहार) में "श्री खाटू श्याम मंडल" के तत्वाधान में होने वाले ३५वे श्री श्याम बसंत महोत्सव के पावन अवसर पर दिनांक १२ फ़रवरी २०११ को प्रसिद्द दैनिक समाचार पत्र "दैनिक जागरण"  में श्री मोरवीनंदन खाटू वाले श्याम बाबा की सुकीर्ति एवं दिव्य चरित्र की महिमा का गायन किया गया... आप सभी श्याम प्रेमी हारे के सहारे मोरवीनंदन बाबा श्याम की पावन पुनीत कथा का रसपान दिये गये लिंक पर भी क्लीक करके कर सकते है...






!! प्रेम से बोलिये !!


मोरवीनंदन श्री श्याम सरकार की सैदव ही जय हो...
लीले के असवार बाबा श्याम की सैदव ही जय हो...
शीश के दानी श्री श्याम बाबा की सैदव ही जय हो...
खाटू वाले बाबा श्यामधणी की सैदव ही जय हो...



Friday, 11 February 2011

!! थे तो कृपा करों नि बाबा श्याम, हृदया स्यूं थांकी अरज करां... !!



ओ म्हारा खाटूवाला श्री श्याम बाबा, आज सुबह सुबह थारा द्वारे पे ऊभा थारा टाबरिया थां सुं आ अरज करे ह कि...




थे तो कृपा करों नि बाबा श्याम, हृदया स्यूं थांकी अरज करां...
थे तो कृपा करों नि बाबा श्याम, हृदया स्यूं थांकी अरज करां...
अरज करां जी  थांकी अरज करां, अरज करां जी  थांकी अरज करां...
थे तो कृपा करों नि बाबा श्याम, हृदया स्यूं थां की अरज करां...



दुखियारा द्वारे पर ऊभा, धरे आप रो ध्यान...
दुखियारा द्वारे पर ऊभा, धरे आप रो ध्यान...
सुखकर्ता, दुःखहर्ता बाबा, थे ही राखोला म्हां को ध्यान...
हृदया स्यूं थांकी अरज करां, हृदया स्यूं थांकी अरज करां...
थे तो कृपा करों नि बाबा श्याम, हृदया स्यूं थांकी अरज करां...



भाई, बंधू, कुटुंब, कबीलो कोई ना आवे काम...
भाई, बंधू, कुटुंब, कबीलो कोई ना आवे काम...
थां बिन अब कुण कष्ट मिटावे, थे ही बनावो बिगड़ा काम...
हृदया स्यूं थांकी अरज करां, हृदया स्यूं थांकी अरज करां...
थे तो कृपा करों नि बाबा श्याम, हृदया स्यूं थांकी अरज करां...



त्रेता द्वापर राम श्याम, कलयुग रा थे अवतार...
त्रेता द्वापर राम श्याम, कलयुग रा थे अवतार...
पाप मिटावो धरती का थे, भगतां का करया उपकार...
हृदया स्यूं थांकी अरज करां, हृदया स्यूं थांकी अरज करां...
थे तो कृपा करों नि बाबा श्याम, हृदया स्यूं थांकी अरज करां...



शरण आये जो साँचा मन सु, कदे न खाली जाये...
शरण आये जो साँचा मन सु, कदे न खाली जाये...
आंध्याँ ने आंख्यां, आंगने बालक, निर्धनिया जी धन पाये...
हृदया स्यूं थांकी अरज करां, हृदया स्यूं थांकी अरज करां...
थे तो कृपा करों नि बाबा श्याम, हृदया स्यूं थांकी अरज करां...



थे तो कृपा करों नि बाबा श्याम, हृदया स्यूं थांकी अरज करां...
थे तो कृपा करों नि बाबा श्याम, हृदया स्यूं  थांकी अरज करां...
अरज करां जी  थांकी अरज करां, अरज करां जी  थांकी अरज करां...
थे तो कृपा करों नि बाबा श्याम, हृदया स्यूं थांकी अरज करां...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!



श्री श्याम प्रभु खाटू वाले की यह अनुपम छवि सिरसा, हरियाणा के श्री श्याम दरबार की है...

Tuesday, 8 February 2011

!! ऐसा वरदान दो श्याम बाबा, मान पाकर न अभिमान आये... !!


हे इष्टदेव, कुलदेव श्री श्याम बाबा, आपके श्री चरणों में हम सभी की यही अरदास है, कि   



ऐसा वरदान दो श्याम बाबा, मान पाकर न अभिमान आये...
ऐसा वरदान दो श्याम बाबा, मान पाकर न अभिमान आये...
आंधियाँ चाहे कष्टों की आये, हम रुके ना कभी चलते जाये...
आंधियाँ चाहे कष्टों की आये, हम रुके ना कभी चलते जाये...
ऐसा वरदान दो श्याम बाबा...



दिन बदलते है, राते बदलती, है समय आगे बढ़ता ही जाता...
है निशा काल जब भी है आता, ना दिशा ज्ञान  हमको सुझाता...
ऐसा मार्ग दिखा दो हमें तो,  दिशा बोध हमें हो जाये...
आंधियाँ चाहे कष्टों की आये, हम रुके ना कभी चलते जाये...
ऐसा वरदान दो श्याम बाबा...



तेरो भक्तों से हमने सुना है, तेरा भोजन बाबा अहम् है...
मेरे अंतर को तुम स्वच्छ कर दो, कोई भी बाबा मुझको वहम है...
ना अहम् में फंसे ना वहम में, ज्योति अंतर में प्रेम जगाये...
आंधियाँ चाहे कष्टों की आये, हम रुके ना कभी चलते जाये...
ऐसा वरदान दो श्याम बाबा...



घोर कलियुग श्री श्याम आया, जो बचा तुम सको तो बचा लो...
नाव बीच भंवर में फंसी है, आकर पतवार तुम ही सम्हालो...
हो 'कुमार' की आशा किरण तुम, दृष्टि तुम पर ही है टिकाये...
आंधियाँ चाहे कष्टों की आये, हम रुके ना कभी चलते जाये...
ऐसा वरदान दो श्याम बाबा...



ऐसा वरदान दो श्याम बाबा, मान पाकर न अभिमान आये...
ऐसा वरदान दो श्याम बाबा, मान पाकर न अभिमान आये...
आंधियाँ चाहे कष्टों की आये, हम रुके ना कभी चलते जाये...
आंधियाँ चाहे कष्टों की आये, हम रुके ना कभी चलते जाये...
ऐसा वरदान दो श्याम बाबा...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!

भजन : "श्री श्रीकुमार जी"

Saturday, 5 February 2011

!! श्री सिंहपोल हनुमान जी महाराज, खाटूश्याम जी !!





आइये आज आप सभी भक्तवृंदो को श्री श्यामधणी के निज खाटू धाम के श्री मंदिर के ड्योढ़ी में विराजित भक्त शिरोमणी श्री राम भक्त हनुमान जी के दर्शन करवाता चलू...  इस पवित्र स्थान पर विराजित श्री हनुमान को 'सिंहपोल हनुमान जी' के नाम से जाना जाता है... आइये सब मिल प्रेम पूरित हृदय की भावनाओं के ये श्रद्धा सुमन श्री सिंहपोल हनुमान जी महाराज को अर्पित करे...



पवन पुत्र हनुमान, थे आओ बेगा चाल...
थे आओ बेगा चाल, बाला आओ बेगा चाल...
जय सीताराम, सीताराम, सीताराम, जय सीताराम...
जय सीताराम, सीताराम, सीताराम, जय सीताराम...



उत्सव की सब त्यारी है, कमी एक बस थारी है...
गजानंद, शिव, मात भवानी,  बाट उडिकै थारी है...
अंजनी माँ का लाल, थे आओ बेगा चाल...
थे आओ बेगा चाल, बाला आओ बेगा चाल...



थारै आण की महारै बाबा, मन म ह उल्लास घणी...
थे ड्योढी पर आता ही, आवलों म्हारो श्यामधणी...
सालासर हनुमान, थे आओ बेगा चाल...
थे आओ बेगा चाल, बाला आओ बेगा चाल...



थारी ड्योढी पर म्हें बाबा, लाल निशान चढ़ावंगा...
थार सागै मिलकर बाबा,  राम-श्याम धुन गावंगा...
बजरंगी बलवान,  थे आओ बेगा चाल...
थे आओ बेगा चाल, बाला आओ बेगा चाल...



"टीकम" बोलै श्याम मंडल संग, पवन पुत्र का जयकारा...
जयकारा की गूंज सुनकर, भक्त हो रहया मतवारा...
महाबीर हनुमान, थे आओ बेगा चाल...
थे आओ बेगा चाल, बाला आओ बेगा चाल...



पवन पुत्र हनुमान, थे आओ बेगा  चाल...
थे आओ बेगा चाल, बाला आओ बेगा चाल...
जय सीताराम, सीताराम, सीताराम, जय सीताराम...
जय सीताराम, सीताराम, सीताराम, जय सीताराम...



!! जय जय पवनपुत्र, भक्ति शिरोमणि, श्री रामभक्त हनुमान जी की !!
!! जय जय मोरवीनंदन, हारे के सहारे, श्री खाटू वाले श्यामधणी की !!


भजन : "श्री महाबीर जी"

Wednesday, 2 February 2011

!! श्याम खाटू वालो, म्हारो श्याम खाटू वालो... !!



म्हारा इष्टदेव, कुलदेव श्यामधणी खाटू वाला जी री महिमा ही न्यारी ह, और भाव विभोर हो बाबा श्यामधणी रा भगतां यु कहवे ह...





श्याम खाटू  वालो, म्हारो श्याम खाटू वालो...
श्याम खाटू वालो, म्हारो श्याम खाटू वालो...
यो लीले चढ़ कर आवे जी, म्हारो श्याम खाटू वालो...
यो ठुमक ठुमक कर चाले जी, म्हारो श्याम खाटू वालो...



माथे पे मुकुट विराजे, कानां म कुण्डल साजे...
यो मोर छड़ी ले आवे जी, म्हारो श्याम खाटू वालो...
श्याम खाटू वालो, म्हारो श्याम खाटू वालो...
यो लीले चढ़ कर आवे जी, म्हारो श्याम खाटू वालो...



आँधा न आँख्या देवे, और पंगुआ चल क  आवे...
गूंगा ने बोली देवे जी, म्हारो श्याम खाटू वालो...
श्याम खाटू वालो, म्हारो श्याम खाटू वालो...
यो लीले चढ़ कर आवे जी, म्हारो श्याम खाटू वालो...



निर्धनियो माया पावे, और बिगड़ा काम बनावे...
बाँझण न पुत्तर देवे जी, म्हारो श्याम खाटू वालो...
श्याम खाटू वालो, म्हारो श्याम खाटू वालो...
यो लीले चढ़ कर आवे जी, म्हारो श्याम खाटू वालो...



'बाबूलाल' खाटू को, चरणा म शीश नवावे...
भक्तां  ने राह दिखावे जी,  म्हारो श्याम खाटू वालो...
श्याम खाटू वालो, म्हारो श्याम खाटू वालो...
यो लीले चढ़ कर आवे जी, म्हारो श्याम खाटू वालो...



श्याम खाटू वालो, म्हारो श्याम खाटू वालो...
श्याम खाटू वालो, म्हारो श्याम खाटू वालो...
यो लीले चढ़ कर आवे जी, म्हारो श्याम खाटू वालो...
यो ठुमक ठुमक कर चले जी, म्हारो श्याम खाटू वालो...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!


भजन : "श्री बाबूलाल जी शर्मा"

Tuesday, 1 February 2011

!! रंग रंगीला श्याम को, रंगीलो दरबार !!


म्हारा रंग रंगीला श्यामधणी जी का दरबार री महिमा ही न्यारी ह, तभी तो सारा भगतां यु कहवे ह...


!! रंग रंगीला श्याम को, रंगीलो दरबार !!
!! छैल छबीलो राज करे, खाटू के दरबार !!



रंग रंगीला श्यामधणी को, रंगीलो दरबार...
रंग रंगीला श्यामधणी को, रंगीलो दरबार...
भगतां के संग नाचे गावे, खाटू को सरदार...
भगतां के संग नाचे गावे, खाटू को सरदार...


!! जय जय लखदातार, जय जय लीले असवार !!


रंग रंगीलो रंग जमावे, आनंद को भण्डार...
मन की वीणा बोल रही है, जय जय लखदातार...
रंग रंगीला श्यामधणी को, रंगीलो दरबार...
भगतां के संग नाचे गावे, खाटू को सरदार...


!!  जय जय लखदातार, जय जय लीले असवार !!


खाटू जी में धाम बण्यो ह, होवे जय जयकार...
श्याम सलोणों रूप सजायो, अनुपम ह श्रृंगार...
रंग रंगीला श्यामधणी को, रंगीलो दरबार...
भगतां के संग नाचे गावे, खाटू को सरदार...


!!  जय जय लखदातार, जय जय लीले असवार !!


दीन दयालु शीश का दानी, महिमा अपरम्पार...
साँचा मन सु जो कोई ध्यावे, होवे बेडो पार...
रंग रंगीला श्यामधणी को, रंगीलो दरबार...
भगतां के संग नाचे गावे, खाटू को सरदार...


!! जय जय लख दातार, जय जय लीले असवार !!


रंग रंगीला श्यामधणी को, रंगीलो दरबार...
रंग रंगीला श्यामधणी को, रंगीलो दरबार...
भगतां के संग नाचे गावे, खाटू को सरदार...
भगतां के संग नाचे गावे, खाटू को सरदार...


!! जय जय लख दातार, जय जय लीले असवार !!



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!

श्री श्याम बाबा के इस अनुपम श्री विग्रह के दर्शन "श्री श्याम मंदिर, झरिया, झारखण्ड" के है...
 
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