/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\!! श्री गणेशाय नमः !!/\/\/\/\/\!! ૐ श्री श्याम देवाय नमः !!\/\/\/\/\!! श्री हनुमते नमः !!/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\

Thursday, 6 January 2011

!! थारी बाबा ओल्युं आवे, बेगा आओ जी सांवरा... !!



"ओल्युं" राजस्थानी भाषा का बहुत ही मीठा शब्द है, जिसका शाब्दिक अर्थ है "याद आना"...  खाटूवाले श्री श्यामधणी के भक्तों को भी अपने अंतर्मन में  नित निरंतर अपने प्रभु की याद बनी रहती है, एवं वे भक्तजन मिजाजी साँवरिया श्री श्याम धणी के श्री चरणों में अपने अंतर्मन के भावों को इस प्रकार भाव विव्हल होकर अभिव्यक्त करते है... 


ओ जी ओ मिजा जी म्हारा साँवरिया...
ओ जी ओ मिजा जी म्हारा साँवरिया...
थारी बाबा ओल्युं आवे, बेगा आओ जी सांवरा ...
थारी बाबा ओल्युं आवे, बेगा आओ जी सांवरा...



थाणे तो मनावां घणा चाव सु...
थाणे तो मनावां घणा चाव सु...
थे हँस हँस कंठ लगाओ, ना तरसाओ जी सांवरा...
थे हँस हँस कंठ लगाओ, ना तरसाओ जी सांवरा...
थारी बाबा ओल्युं आवे, बेगा आओ जी सांवरा...



ई दुनिया से न्यारो थारो देवरों...
ई दुनिया से न्यारो थारो देवरों...
थे रत्न सिंहासन बैठ्या, हुकुम चलाओ जी सांवरा...
थे रत्न सिंहासन बैठ्या, हुकुम चलाओ जी सांवरा...
थारी बाबा ओल्युं आवे, बेगा आओ जी सांवरा...



नयना माहि छलके थारो नेहरलो...
नयना माहि छलके थारो नेहरलो...
थारा टाबरिया रा अटक्या, काज बनाओ जी सांवरा...
थारा टाबरिया रा अटक्या, काज बनाओ जी सांवरा...
थारी बाबा ओल्युं आवे, बेगा आओ जी सांवरा...



भूल्या थारे टाबरिया ने नाहि सरे...
भूल्या थारे टाबरिया ने नाहि सरे...
थारी जादुगारी  मोरछड़ी म्हापे घुमादयो जी सांवरा...
थारी जादुगारी  मोरछड़ी म्हापे घुमादयो जी सांवरा...
थारी बाबा ओल्युं आवे, बेगा आओ जी सांवरा...



भुल्योरा रा भक्तां ना थारो आसरो....
भुल्योरा रा भक्तां ना थारो आसरो....
म्हारी नैया नाथ पुराणी पार लगाओ जी सांवरा...
म्हारी नैया नाथ पुराणी पार लगाओ जी सांवरा...
थारी बाबा ओल्युं आवे, बेगा आओ जी सांवरा...



जागरणों ग्यारस की च्याणन रात को...
जागरणों ग्यारस की च्याणन रात को...
कोई बारस न थे खीर चुरमो खाओ जी सांवरा...
कोई बारस न थे खीर चुरमो खाओ जी सांवरा...
थारी बाबा ओल्युं आवे, बेगा आओ जी सांवरा...



जिमा पाछे थारा हाथ धुवास्याँ...
जिमा पाछे थारा हाथ धुवास्याँ...
ल्यो दो बीड़ा थे मगही पान, चबाओ जी सांवरा...
ल्यो दो बीड़ा थे मगही पान, चबाओ जी सांवरा...
थारी बाबा ओल्युं आवे, बेगा आओ जी सांवरा...



'शर्मा कांशीराम' जी थारो बालकियो...
'शर्मा कांशीराम' जी थारो बालकियो...
थारा कहया कहया हुकुम उठावां, ज्यु फरमाओ जी सांवरा...
थारा कहया कहया हुकुम उठावां, ज्यु फरमाओ जी सांवरा...



ओ जी ओ मिजा जी म्हारा साँवरिया...
ओ जी ओ मिजा जी म्हारा साँवरिया...
थारी बाबा ओल्युं आवे, बेगा आओ जी सांवरा ...
थारी बाबा ओल्युं आवे, बेगा आओ जी सांवरा...



!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!
श्री श्याम बाबा को अर्पित यह अतिसुन्दर भाव मुझे बहुत ही पसंद है, जिसे कि मैं बचपन में अपनी दादीजी के मुख से अक्सर सुना करता था.. इस सुमधुर एवं ममस्पर्शी भाव को 'श्याम जी की ओल्युं' भी कहते है, इसके  रचियता "परम श्याम भक्त  श्री कांशीराम जी शर्मा" है... 

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थे भी एक बार श्याम बाबा जी रो जयकारो प्रेम सुं लगाओ...

!! श्यामधणी सरकार की जय !!
!! शीश के दानी की जय !!
!! खाटू नरेश की जय !!
!! लखदातार की जय !!
!! हारे के सहारे की जय !!
!! लीले के असवार की जय !!
!! श्री मोरवीनंदन श्यामजी की जय !!

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