/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\!! श्री गणेशाय नमः !!/\/\/\/\/\!! ૐ श्री श्याम देवाय नमः !!\/\/\/\/\!! श्री हनुमते नमः !!/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\/\

Thursday, 30 June 2011

!! यादों में तेरे श्याम, हम नीर बहाते हैं... !!







अक्सर ऐसा कहा जाता है, प्रेम आत्मा का दर्पण होता है... प्रेम की ताकत के आगे परम पिता परमेश्वर भी बेबस हो जाते है अर्थात प्रेम में वह शक्ति है, कि जीव भगवद स्वरुप का साक्षात्कार कर सकता है... प्रभु से प्रेम करने वाला भक्त संसार के किसी भी चीज़ से भयभीत नहीं होता... क्योंकि वह अपना तन-मन प्रभु को समर्पित कर चुका होता है...


मेरा ऐसा मानना है की, प्रेम का भाव छिपाने से भी छिपता नहीं है... प्रेम जिस हृदय में प्रकट होकर उमड़ता है उस को छिपाना उस हृदय के वश में भी नहीं होता है... और वह इसे छिपा भी नहीं पाता है... यदि वह मुख से प्रेम-प्रीत की कोई बात न बोल पाए तो उसके नेत्रों से प्रेम के पवित्र अश्रुओं की धारा निकल पड़ती है अर्थात् हृदय के प्रेम की बात नेत्रों से स्वत: ही प्रकट हो जाती है... और प्रभु मिलन को तरसता वो हृदय प्रेमाश्रुओं के साथ इस प्रकार अपने ईष्टदेव से अनुनय विनय करने लगता है...


इस मधुर भाव का रसास्वादन यहाँ करे...





श्याम मेरे श्याम, श्याम बाबा श्याम...
श्याम मेरे श्याम, श्याम बाबा श्याम...




यादों में तेरे श्याम, हम नीर बहाते हैं...
आते  क्यों नहीं मेरे श्याम, क्यों आप सताते हैं...
यादों में तेरे श्याम, हम नीर बहाते हैं...
आते नहीं क्यों घनश्याम, क्यों आप सताते हैं...



श्याम मेरे श्याम, श्याम बाबा श्याम...
श्याम मेरे श्याम, श्याम बाबा श्याम...




बैठे हैं राहों में, पलकों को बिछाये हम...
कब होगी महर तेरी, पलकों पे तेरी रहम...
अब और न देर करो, हम तुमको बुलाते हैं...
यादों में तेरे श्याम, हम नीर बहाते हैं...



श्याम मेरे श्याम, श्याम बाबा श्याम...
श्याम मेरे श्याम, श्याम बाबा श्याम...




प्यासा है दिल मेरा, प्यासे हैं नयन मेरे...
तूं प्यास बुझादे श्याम, दे कर दर्शन तेरे...
दर्शन को हम तरसे, हमें क्यों तरसाते हैं...
यादों में तेरे श्याम, हम नीर बहाते हैं...



श्याम मेरे श्याम, श्याम बाबा श्याम...
श्याम मेरे श्याम, श्याम बाबा श्याम...




शीशा सा दिल है मेरा, पत्थर ना समझ लेना...
'टीकम' गर टूट गया, चरणों में तूं लेना...
कण- कण में तूं है श्याम, ये तो दर्शाते है...
यादों में तेरे श्याम, हम नीर बहाते हैं...



श्याम मेरे श्याम, श्याम बाबा श्याम...
श्याम मेरे श्याम, श्याम बाबा श्याम...




यादों में तेरे श्याम, हम नीर बहाते हैं...
आते नहीं क्यों घनश्याम, क्यों आप सताते हैं...
यादों में तेरे श्याम, हम नीर बहाते हैं...
आते नहीं क्यों घनश्याम, क्यों आप सताते हैं...



श्याम मेरे श्याम, श्याम बाबा श्याम...
श्याम मेरे श्याम, श्याम बाबा श्याम...

!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय लखदातारी, जय जय श्याम बिहारी !!
!! जय कलयुग भवभय हारी, जय भक्तन हितकारी !!


भाव के रचियता : "श्री महाबीर जी"

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थे भी एक बार श्याम बाबा जी रो जयकारो प्रेम सुं लगाओ...

!! श्यामधणी सरकार की जय !!
!! शीश के दानी की जय !!
!! खाटू नरेश की जय !!
!! लखदातार की जय !!
!! हारे के सहारे की जय !!
!! लीले के असवार की जय !!
!! श्री मोरवीनंदन श्यामजी की जय !!

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