हे इष्टदेव, कुलदेव खाटूवाले श्री श्यामबिहारी, आपके श्री चरणों के सेवकजन आपसे केवल यही विनती करते है, कि...
दर्शन दयो श्री श्याम तुम बिन कौन हमारा...
दुःख दूर करो आपका है एक सहारा...
दर्शन... दर्शन... दर्शन... दर्शन...
तुमने महाभारत में अपना कौशल दिखलाया, बाबा कौशल दिखलाया...
श्री कृष्ण को दे शीश दान में ऐसा वर पाया, बाबा ऐसा वर पाया...
कलिकाल में पूजा तेरी सौभाग्य हमारा...
दुःख दूर करो आपका है एक सहारा...
दर्शन दयो श्री श्याम तुम बिन कौन हमारा...
दुःख दूर करो आपका है एक सहारा...
दर्शन... दर्शन... दर्शन... दर्शन...
मेरे ही श्याम नाम तुम, देवो के देव हो, बाबा देवो के देव हो...
जो शरण तेरी में आये, उसका पूरण काम हो, उसका पूरण काम हो...
धन, धान्य, पुत्र और पोत्र ये वरदान तुम्हारा...
दुःख दूर करो आपका है एक सहारा...
दर्शन दयो श्री श्याम तुम बिन कौन हमारा...
दुःख दूर करो आपका है एक सहारा...
दर्शन... दर्शन... दर्शन... दर्शन...
इसमें नहीं कछु भेद है, श्री कृष्ण समझावे, हाँ श्री कृष्ण समझावे...
तेरे भगत करते ध्यान बाबा श्याम कब आवे, हाँ बाबा श्याम कब आवे...
जब चूरमा कर प्रेम से, फिर ज्योत जगाता...
दुःख दूर करो आपका है एक सहारा...
दर्शन दयो श्री श्याम तुम बिन कौन हमारा...
दुःख दूर करो आपका है एक सहारा...
दर्शन... दर्शन... दर्शन... दर्शन...
हे श्याम बाबा आये है, हम शरण तुम्हारी, बाबा शरण तुम्हारी...
मेटो हमारे संकट हे श्री श्यामबिहारी, बाबा श्री श्यामबिहारी...
ऐसा देओ वरदान हो कल्याण हमारा...
दुःख दूर करो आपका है एक सहारा...
दर्शन दयो श्री श्याम तुम बिन कौन हमारा...
दुःख दूर करो आपका है एक सहारा...
दर्शन... दर्शन... दर्शन... दर्शन...
एक विनती है "मात्रदत्त" की श्याम आपसे, बाबा श्याम आपसे...
जाणु नहीं कछु भाव भक्ति अपने विचार से, बाबा अपने विचार से...
हो नाथ कैसे पापों से छुटकारा हमारा...
दुःख दूर करो आपका है एक सहारा...
दर्शन दयो श्री श्याम तुम बिन कौन हमारा...
दुःख दूर करो आपका है एक सहारा...
दर्शन... दर्शन... दर्शन... दर्शन...
आप सभी इस सुमधुर भाव को श्री संजय मित्तल जी के स्वर में नीचे दिए गए लिंक पर क्लीक करके सुन भी सकते है...
!! जय जय मोरवीनंदन, जय जय बाबा श्याम !!
!! काम अधुरो पुरो करज्यो, सब भक्तां को श्याम !!
!! जय जय शीश के दानी, जय जय खाटू धाम !!
!! म्हे आया शरण तिहारी, शरण म अपणे लेलो श्याम !!
भाव के रचियता : "श्री मात्रदत्त जी"



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